Acharya RahulKrishna Shastri

श्री मदभागवत कथा,श्रीरामकथा ,श्री शिव महापुराण प्रवक्ता..

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पूज्य गुरुदेव की कृपा से आच्छादित राहुलकृष्णजी की रुचि बाल्यकाल से ही सनातन वैदिक जगत में रही है। श्रद्धैय भगवनजी(गुरुदेव) से श्रुति परम्परा द्वारा अध्ययन कर श्री श्रीविद्याधाम(इंदौर)में आपने वेद,शास्त्र, ज्योतिष और पुराणादि ग्रंथों का अध्ययन-अध्यापन किया।देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से संस्कृत प्राच्य विषय के साथ स्नातकोत्तर(एम.ए. संस्कृत)कर आपने केदारखण्ड में गुप्तकाशी के समीप मंदाकिनी एवं मधुगंगा के संगम पर पूज्य गुरुदेव के पावन सानिध्य में श्रीमद्भागवत का अध्ययन कर सर्वप्रथम माँ गंगा को अपनी वाणी से भागवतजी के सात पारायण अर्पित किये।सन्तो का सान्निध्य, गुरुदेव की अनन्त कृपा का ही नवनीत है कि बैंक की नोकरी का प्रलोभन त्याग कर शास्रोंक्त जीवन पद्धति का निर्वाह करने का व्रत धारण करने वाले आचार्यश्री ने तीर्थ स्थल उज्जैन(कुम्भ मेला),ओमकारेश्वर,नैमिषारण्य सहित देश के विभिन्न भागों में श्रीमद्भागवतजी के साथ श्रीराम कथा,देवीभागवत, शिवपुराण एवं नानीबाई का मायरा आदि का गुणगान किया है।
जगज्जननी माँ पराम्बा की शरणागति ओर सनातन वैदिक संस्कृति का विद्यार्थी बनकर अहैतु के कृपा प्रसाद से जन-जन को तृप्त करना ही आपके जीवन का उद्देश्य है,ओर शायद यही कारण है कि आपके द्वारा की जाने वाली भागवतादि कथाओं में अन्यान्य विषयों की न्यूनता और शास्रोंक्त वार्ता की प्रधानता रहती है।